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नारी

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 जीवन का आधार है नारी  खुशियों का संसार है नारी                                  लक्ष्मी, सरस्वती या पार्वती हर नारी में कोई एक बसी को चंडी, काली या दुर्गा बनकर भी बनाती कुछ को मुजो जो जान कर नारी का अपमान करे अनजाने मे ये काम करे सजा सभी के भाग्य में सिली किसी को कम किसी  को ज्यादा मिली मां बन नया जीवन देती नारी चरणों में स्वर्ग इसके बात ये जनहित में जारी संतान उसकी जान है उसमें बसते प्राण है नारी होती दया की मूरत भगवान की रचना ये खूबसूरत

वीर शिवाजी

 जो थे  भारतीय शहंशाहों के नेताजी नाम है उनका वीर शिवाजी मां थी जिनकी जीजा बाईं जिनकी कहानियों ने उनमें वीरता की अलख जगाई पुणे को अपना गढ़ चुना अपनी वीरता का वहां से तानाबाना बुना गोरिल्ला युद्ध में खुदको माहिर बनाया शिवाजी किसी के हाथ ना आया औरंगजेब को खूब छ काया अंग्रेजो को भी ख़ूब डराया महल में जब नहीं ली इनकी सुध तब थर्राया ये धरती पुत्र धर्मनिपेक्षता का भाव दे रहा उनका हर सेनानी कह रह वार जनरल नहीं कोई  ऐसा कूट नितज्ञ उनके जैसा

तू(तुम)

 हर पल तू पल भर तू तू। है वहीं। मगर तू ही नहीं पल में आए पल में जाए दिल ये   अपना तुझको ना समझ पाएं भुला तुझको सुला तुझको तेरे बिन अब आराम नहीं मुझको हर पल रहा तेरे संग बिन। तेरे मै कटी पतंग तुमसे मिलना ना पहली दफा फिर क्यों हुए तुमतो खफा  तुम यूं रूठ ना जाना बस इस दिल में आना

Jin dgi

 राह ये तेरी उस पर ये दोपहरी होगयामेरी ये कहानी उस पर ये  नादानी ये गाती राह नथे जाती उड़ना सी खा फिर से जीना सीखा दिल से कुछ राह ऐसी चुनी किस्मत के ताने बाने में बुनी हो गया मुझसे प्यार फिर भी मै नागवार जब सामान खुद को पाया कदमों को बाहर घर से पाया रंग दिखा गीत जिंदगी छीलकर में हर खुशी निभा ही मुझसे बंदगी साथ मेरा दिया रबने वक्त ये लगा सुधरने