नारी

 जीवन का आधार है नारी 

खुशियों का संसार है नारी                                 

लक्ष्मी, सरस्वती या पार्वती

हर नारी में कोई एक बसी को

चंडी, काली या दुर्गा

बनकर भी बनाती कुछ को मुजो

जो जान कर नारी का अपमान करे

अनजाने मे ये काम करे

सजा सभी के भाग्य में सिली

किसी को कम किसी  को ज्यादा मिली

मां बन नया जीवन देती नारी

चरणों में स्वर्ग इसके बात ये जनहित में जारी

संतान उसकी जान है

उसमें बसते प्राण है

नारी होती दया की मूरत

भगवान की रचना ये खूबसूरत








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