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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Roshní

  रोशनी के साथ कैसे जिन्दगी है चल रही कुशिओ के आंगन में जैसे नन्हीं कलियां फल रही, हो रहा आगाज़ उन से अ ब नए ज़माने का मिल गया बहाना मुझे अब कुषिय मानाने का नन्ही चिड़िया अधखुले पंखों से उड़ने को मचल रही रोशनी के साथ कैसे जिंद गी है चल रही भयानक सर्द मौसम। को सावन की तरह सहता जा रही वक्त ये गुजर जाएगा बात ये कहता जा बस ये रुक जाएगा बस तेरे रोने से बरसात ये थम जाएगी तेरे चुप होने से मेरी ये एक उमंग तुझमें ही बह रही रोशनी के  साथ कैसे जिंदगी है चल रही

बसेरा

तेरा बसेरा ऐसा हो  मेरे दिल के जैसा हो   यहां आना आपनी मर्जी से और जाना मेरी अर्जी से घर अपना इसे समझ लेना बदले में बस इक पप्पी दे देना बिना तेरे नही आता करार तेरे हुस्न की कैदसे नहींहो होना चाहता फरार तेरा बसेरा ऐसा हो  सवेरे के सूरज जैसा हो   शीतल ता होती पावन   सबको लगे मनभावन हर मर्ज की एक दवा स्पर्श से तेरे हो जाते हवा तेरा बसेरा ऐसा हो Aदीवाली के त्यौहार जैसा हो चारों ओर खु श हाली हो समृद्धि तेरी घरवाली हो रखे तुझे हमेशा जकड़े बसेरे को तेरे हमेशा रखे पकड़े

हुस्न तेरा

नजर से नज़र जब मिल गई आपस में बात ये खुद से कह गई हुस्न ये तेरा मचल मुझसे ये तारीफ़ कहकर रोज तेरा दीदार करना ठंडी ठंडी आहें भरना सोनी मेरी चॉइस कितनी कोयल की मीठी वॉइस जितनी जीभरके उसका दीदार कर लू भाहों में उसको भहर लू  हुस्न ये तेरा देख कर मुझसे ये तारीफ़ कहकर तुझमें ही खो जाऊं बाहों तेरी सो जाऊं

पहलवान

 कभी अर्श कभी फर्श भाग्य का खेल निराला    बिरले का  दिवाला निकाला अखाड़ा जिसका छत्रसाल कोच वहीं उसका सतपाल कॉमनवेल्थ खेलों में कहर बरपाया ओलंपिक में भी तिरंगा फहराया भारत देश का ये चीता हर जगह जाकर जीता पहल वानी में लगा कद्द बढ ने कामयाबी लगी सिर चढ़ ने सब उसी के गुणगान गाए छत्रसाल में कोई उससे बड़ा ना बन  पाए सुशील के दोस्तों को भाभी बन गई वो सतपाल की बेटी सावी दिल्ली मे अपना गैंग बनाया हर पहलवान को भर्ती कराया दिल्ली में सागर धनकर आया पहलवान बन ने का उसको खुमार छाया जूनियर चैंपियन का खिताब उसको पाया शुशील से हुई उसकी अनबन सिर पर आई उसके मौत बन