Roshní
रोशनी के साथ कैसे जिन्दगी है चल रही कुशिओ के आंगन में जैसे नन्हीं कलियां फल रही, हो रहा आगाज़ उन से अ ब नए ज़माने का मिल गया बहाना मुझे अब कुषिय मानाने का नन्ही चिड़िया अधखुले पंखों से उड़ने को मचल रही रोशनी के साथ कैसे जिंद गी है चल रही भयानक सर्द मौसम। को सावन की तरह सहता जा रही वक्त ये गुजर जाएगा बात ये कहता जा बस ये रुक जाएगा बस तेरे रोने से बरसात ये थम जाएगी तेरे चुप होने से मेरी ये एक उमंग तुझमें ही बह रही रोशनी के साथ कैसे जिंदगी है चल रही