पहलवान

 कभी अर्श कभी फर्श

भाग्य का खेल निराला  

 बिरले का  दिवाला निकाला

अखाड़ा जिसका छत्रसाल

कोच वहीं उसका सतपाल

कॉमनवेल्थ खेलों में कहर बरपाया

ओलंपिक में भी तिरंगा फहराया

भारत देश का ये चीता

हर जगह जाकर जीता

पहल वानी में लगा कद्द बढ ने

कामयाबी लगी सिर चढ़ ने

सब उसी के गुणगान गाए

छत्रसाल में कोई उससे बड़ा ना बन  पाए

सुशील के दोस्तों को भाभी

बन गई वो सतपाल की बेटी सावी


दिल्ली मे अपना गैंग बनाया

हर पहलवान को भर्ती कराया

दिल्ली में सागर धनकर आया

पहलवान बन ने का उसको खुमार छाया

जूनियर चैंपियन का खिताब उसको पाया

शुशील से हुई उसकी अनबन

सिर पर आई उसके मौत बन







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