तू(तुम)
हर पल तू पल भर तू
तू। है वहीं। मगर तू ही नहीं
पल में आए पल में जाए
दिल ये
अपना तुझको ना समझ पाएं
भुला तुझको सुला तुझको
तेरे बिन अब आराम नहीं मुझको
हर पल रहा तेरे संग
बिन। तेरे मै कटी पतंग
तुमसे मिलना ना पहली दफा
फिर क्यों हुए तुमतो खफा
तुम यूं रूठ ना जाना
बस इस दिल में आना
Bahut hi badhiya rachna
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