विष को शिव ने धारण किया तुम भी मुझको कर लो ना दुर्गा ,पारवती नहीं बनना तुम नीलकंठ तुम बनलो ना शब्दों काये माया जाल कुछ ऐसी मेरी ताल या तेरा कमाल ऐसी तेरी दिव्य कीर्ति ऐसा मेरा सवाल कुछ ऐसा तेरा शौक चढ़ा जिद पे तेरा भौकाल अड़ा
संदेश
देश के बीर
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भारत मेरी मातृ भूमि माथे लगा इसकी धूलि देश भक्ति के गीत गा रहा सरह द पर तिरंगा लहरा रहासेना _,50 डिग्री की हो सर्दी तन पे रहती दे श की वर्दी तन को वो गर्मी भरता भारत का सैनिक किसी से नहीं डरता या हो पुलिस या हो सैनिक देश सुरक्षा में लगे रहते दैनिक जिन वीरों ने देश को आजादी दिलाई शहादत से उनकी आजादी पाईं
नारी
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जीवन का आधार है नारी खुशियों का संसार है नारी लक्ष्मी, सरस्वती या पार्वती हर नारी में कोई एक बसी को चंडी, काली या दुर्गा बनकर भी बनाती कुछ को मुजो जो जान कर नारी का अपमान करे अनजाने मे ये काम करे सजा सभी के भाग्य में सिली किसी को कम किसी को ज्यादा मिली मां बन नया जीवन देती नारी चरणों में स्वर्ग इसके बात ये जनहित में जारी संतान उसकी जान है उसमें बसते प्राण है नारी होती दया की मूरत भगवान की रचना ये खूबसूरत
वीर शिवाजी
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जो थे भारतीय शहंशाहों के नेताजी नाम है उनका वीर शिवाजी मां थी जिनकी जीजा बाईं जिनकी कहानियों ने उनमें वीरता की अलख जगाई पुणे को अपना गढ़ चुना अपनी वीरता का वहां से तानाबाना बुना गोरिल्ला युद्ध में खुदको माहिर बनाया शिवाजी किसी के हाथ ना आया औरंगजेब को खूब छ काया अंग्रेजो को भी ख़ूब डराया महल में जब नहीं ली इनकी सुध तब थर्राया ये धरती पुत्र धर्मनिपेक्षता का भाव दे रहा उनका हर सेनानी कह रह वार जनरल नहीं कोई ऐसा कूट नितज्ञ उनके जैसा