विष को शिव ने धारण  किया

तुम भी मुझको कर लो ना

दुर्गा ,पारवती नहीं बनना तुम

नीलकंठ तुम बनलो ना


शब्दों काये माया जाल

कुछ ऐसी मेरी ताल  या तेरा कमाल

 ऐसी तेरी दिव्य कीर्ति ऐसा मेरा सवाल

कुछ ऐसा तेरा शौक चढ़ा जिद पे तेरा भौकाल अड़ा

 

 



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