संदेश

Roshní

  रोशनी के साथ कैसे जिन्दगी है चल रही कुशिओ के आंगन में जैसे नन्हीं कलियां फल रही, हो रहा आगाज़ उन से अ ब नए ज़माने का मिल गया बहाना मुझे अब कुषिय मानाने का नन्ही चिड़िया अधखुले पंखों से उड़ने को मचल रही रोशनी के साथ कैसे जिंद गी है चल रही भयानक सर्द मौसम। को सावन की तरह सहता जा रही वक्त ये गुजर जाएगा बात ये कहता जा बस ये रुक जाएगा बस तेरे रोने से बरसात ये थम जाएगी तेरे चुप होने से मेरी ये एक उमंग तुझमें ही बह रही रोशनी के  साथ कैसे जिंदगी है चल रही

बसेरा

तेरा बसेरा ऐसा हो  मेरे दिल के जैसा हो   यहां आना आपनी मर्जी से और जाना मेरी अर्जी से घर अपना इसे समझ लेना बदले में बस इक पप्पी दे देना बिना तेरे नही आता करार तेरे हुस्न की कैदसे नहींहो होना चाहता फरार तेरा बसेरा ऐसा हो  सवेरे के सूरज जैसा हो   शीतल ता होती पावन   सबको लगे मनभावन हर मर्ज की एक दवा स्पर्श से तेरे हो जाते हवा तेरा बसेरा ऐसा हो Aदीवाली के त्यौहार जैसा हो चारों ओर खु श हाली हो समृद्धि तेरी घरवाली हो रखे तुझे हमेशा जकड़े बसेरे को तेरे हमेशा रखे पकड़े

हुस्न तेरा

नजर से नज़र जब मिल गई आपस में बात ये खुद से कह गई हुस्न ये तेरा मचल मुझसे ये तारीफ़ कहकर रोज तेरा दीदार करना ठंडी ठंडी आहें भरना सोनी मेरी चॉइस कितनी कोयल की मीठी वॉइस जितनी जीभरके उसका दीदार कर लू भाहों में उसको भहर लू  हुस्न ये तेरा देख कर मुझसे ये तारीफ़ कहकर तुझमें ही खो जाऊं बाहों तेरी सो जाऊं

पहलवान

 कभी अर्श कभी फर्श भाग्य का खेल निराला    बिरले का  दिवाला निकाला अखाड़ा जिसका छत्रसाल कोच वहीं उसका सतपाल कॉमनवेल्थ खेलों में कहर बरपाया ओलंपिक में भी तिरंगा फहराया भारत देश का ये चीता हर जगह जाकर जीता पहल वानी में लगा कद्द बढ ने कामयाबी लगी सिर चढ़ ने सब उसी के गुणगान गाए छत्रसाल में कोई उससे बड़ा ना बन  पाए सुशील के दोस्तों को भाभी बन गई वो सतपाल की बेटी सावी दिल्ली मे अपना गैंग बनाया हर पहलवान को भर्ती कराया दिल्ली में सागर धनकर आया पहलवान बन ने का उसको खुमार छाया जूनियर चैंपियन का खिताब उसको पाया शुशील से हुई उसकी अनबन सिर पर आई उसके मौत बन

हाड़ी रानी

 एक था राजा एक थी रानी हाड़ा राजा हाड़ी रानी  इनकी थी अलबेली कहानी थोड़ी प्यार की थोड़ी त्याग की  प्यार के चर्चे कॉमन थे  और रानी के रूप यौवन के  राजा मेवाड़ की फौज में था सरदार  रानी का उस पर चढ़ा ऐसा खुमार   वो भूल गया राजा का रूप नया कार्य में उसका मन ना लागे रानी की ओर हर पल भागे लड़ाई से लगा वो पल्ला झाड़ने तब मेवाड़ लगा था हारने जोरदार था रानी का नूर  कर्तव्य पथ को राजा गया भूल राजा की राहें टेडी मेडी बन गई खूसूरती पैरों की बेड़ी रानी ने जानी राजा की व्यथा Tejpratap कह र हा कथा रानी ने राजा। को दूत भेजा कटा सिर मेरा साथ लेजा राजा की आंखे रह गई खुली कर्तव्य मार्ग की फिर राह चुनी

ताऊ, ते

गलती से हो गई मेरी शादी लाइसेंस मिल गया आबादी बढ़ाने का दहेज़ में मिला बादाम, पिस्ता बारात लाए लेकर रिक्शा सरकार का ऐसा फ़रमान आया शादी में बस 50 लोगों को बुला पाया गुस्से में मेरा ताऊ आया जब शादी में नहीं बुलाया ताऊ के आगे ते लगाया अरब सागर में तूफ़ान मचाया ताऊ से मैंने माफी मांगी जल्दी होगी बन्द तूफान और आंधी  

अजी जन

 एक बात तुमको बतानी 57 की क्रांति की एक कहानी  अजी जन था उसका नाम  तवायफ वाला करती काम क्रांति का भाव उसमे जगा हवा जितना तेज़ उसका घोड़ा भगा क्रान्तिकारियो का संदेश पहुंचाना घायलों की देखरेख कर पाना उत्साह क्रांति कारियो का बढ़ना यही था उसका काम नहीं थाय उसको आराम Í