सर के लिए

 कुछ ऐसी हल चल चल रही मन में

इक नन्ही सी जिम्मेदारी आरारही जीवन में

उस जननी के दर्द का अहसास है मुझको

बढ़ने वाली है जिम्मेदारी याद है मुझको 

मेरी आंखों में पानी है

पर दिल से मुस्कुरा हूं मैं

अपने बाग में फूल खिलने का सुकून पारहा हूं मैं

अपनी खुशी में गाए जा रहा हूं मैं 

असमंजस में हूं कि प्रसाद मे क्या मिलेगा

लड़की फूल सी या लड़का फाओलाद होगा

पर जो भी हो वो मेरी आओलाद होगा

उसके साथ में फिर से जी जाऊंगा

एक सांस में जिंदगी को पी जाऊंगा



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