राहें वो जो थी कभी

भूल गए अब वो गली ,राहें वो जो थी कभी
लहराते थे वहीँ सभी अब भी मिल जाते हैं कभी कभी
जब याद दिलाती वो राहें खुल जाती मेरी बाहें
उन राहों को भी सलाम उन मंजिलों को भी प्रणाम
वहां था सुकून वही था जूनून
संकरी सी राहें चलो खोलकर बाहें





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