हाड़ी रानी
एक था राजा एक थी रानी
हाड़ा राजा हाड़ी रानी
इनकी थी अलबेली कहानी
थोड़ी प्यार की थोड़ी त्याग की
प्यार के चर्चे कॉमन थे
और रानी के रूप यौवन के
राजा मेवाड़ की फौज में था सरदार
रानी का उस पर चढ़ा ऐसा खुमार
वो भूल गया राजा का रूप नया
कार्य में उसका मन ना लागे
रानी की ओर हर पल भागे
लड़ाई से लगा वो पल्ला झाड़ने
तब मेवाड़ लगा था हारने
जोरदार था रानी का नूर
कर्तव्य पथ को राजा गया भूल
राजा की राहें टेडी मेडी
बन गई खूसूरती पैरों की बेड़ी
रानी ने जानी राजा की व्यथा
Tejpratap कह र हा कथा
रानी ने राजा। को दूत भेजा
कटा सिर मेरा साथ लेजा
राजा की आंखे रह गई खुली
कर्तव्य मार्ग की फिर राह चुनी
Lajawab! Shandar!
जवाब देंहटाएंWahhh
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