महारथी कर्ण

सूर्यपुत्र जिसको जाना

सूत पुत्र उसको माना

कुन्ती ने जिसको नकारा

लोगों ने उसको धिक्कारा

राधा ने अपना बेटा बनाया

कर्ण को मां का आंचल पाया

दुर्योधन ने राजा बनाया

मित्रता का हाथ बढ़ाया

भुला सब धर्म अधर्म

मित्रता ही उसके लिए परम धर्म

अधरम का दिया उसने साथ

एक महारथी का होगया नाश 


किसी की भावनाओं को आहत करना मेरा मकसद नहीं है।



















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