सूरज

 सूरज की तरह खिल रहा मेरा चमन ,
अब हो रहा हमेरा पतन,
यू ही चलते फिरते गिर पड़ा मैं,I
फिर से उठने काओश कर रहा हूं जतन ,
नहीं मेरा कोई वतन है नहीं मेरा कोई गगन,
पर फिर भी कोहीशि कर रहा हूं,
यूं ही भर जाए बिन आंसू मेरे नयन।।।

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट