भारतवासी
सरहद पर हरदम डटा रहा
घर के भेडियो से मैं लड़ता रहा
मओवादियों से हरदम लड़ता
उग्रवादियों से मैं नहीं डरता
तेरी गोद की मैं संतान
भारत भूमि का मैं इंसान
फसलों को मैं उगाता रहा
खेती कर घर चलाता रहा
स्वदेशी चीजों की अलख जलाता
सब भाइयों को खाना देता
तेरी गोद की मैं संतान
भारत भूमि का मैं इंसान
अंतरिक्ष की खाक छानता
पूरा विश्व मुझे मानता
शून्य के बिना जैसे गणित ना पूरा
मेरे बिना जैसे विश्व अधूरा
ज्योतिष,भौतिक या विज्ञान
खगोल,गणित या अनुसंधान
तेरी गोद की मैं संतान,
भारत भूमि का मैं इंसान
घर के भेडियो से मैं लड़ता रहा
मओवादियों से हरदम लड़ता
उग्रवादियों से मैं नहीं डरता
तेरी गोद की मैं संतान
भारत भूमि का मैं इंसान
फसलों को मैं उगाता रहा
खेती कर घर चलाता रहा
स्वदेशी चीजों की अलख जलाता
सब भाइयों को खाना देता
तेरी गोद की मैं संतान
भारत भूमि का मैं इंसान
अंतरिक्ष की खाक छानता
पूरा विश्व मुझे मानता
शून्य के बिना जैसे गणित ना पूरा
मेरे बिना जैसे विश्व अधूरा
ज्योतिष,भौतिक या विज्ञान
खगोल,गणित या अनुसंधान
तेरी गोद की मैं संतान,
भारत भूमि का मैं इंसान
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