बचपन

  उमर मेरी पचपन
याद आ रहा बचपन
गुड्डे गुडियों की शादी करना
डॉक्टर डॉक्टर खेल का समा बंधना
कागज के समान तैयार करना
नाव कागज की पानी मै तैराना दिन भर उधम मचाना
भरी धूप में पतंग उड़ाना

खेलते खेलते थक कर रुकना
थक कर मां के आंचल में छुपना

जब भी जाते इधर उधर फैला
लगते हम बिल्कुल छैला
कुछ ऐसा था बचपन
याद आ रहा जब उमर पचपन।।

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